प्रमिला शंकर
इण सदी री कवयित्री।
इण सदी री कवयित्री।
आजकाल 'वीगन'
आस निरास में
आंधळघोटौ
चिरमी रौ गीत
दूजौ घर
गांव अर स्हैर
गूगळ
हूं लिखी आंख्यां देखी
जमघट
जावतै बरस री जुदाई
जेठ री लूवां
कचरो चुगण आळी बा छोरी
काळी जीजी
काळी-पीळी आंधी
कळजुग
कऊ बुझ्यां पछै
कऊ
कुरुक्षेत्र
लीला रुंख री हत्या
मां रै नांव रा आखर
मरुथळ री संस्कृति
माटी जद बात संभाळी
मेळौ
म्हारी डायरी
म्हारौ लेखण
मिरत्यू
मोरचंग
मोरचंग
मरुथळ री संस्कृति
पान-फूल
रोहिड़ो
सुदामा
वीगन