हिंदी-अंग्रेजी रै

फेर में

चितबांगी हुयोड़ी

मानता रै अभाव में

आपौ राखती,

बैसाख्यां

रै आसरै हालती

डगमगावती

मायड़ भासा

मोत्यां सूं मूंगै साहित्य

अर जूनी ओळियां रौ

अरथ खोवती मायड़ भासा

रीत-रिवाज सूं

अणजांण,

धीमौ पड़तौ भासा रौ पोखण

धुंधळौ व्हैतौ जा रियौ है

समाज रौ दरपण-दरसण

नूवी पीढी में

आचार-विचार रौ

अग्यान

अर रीत नीत नै परिवेस में

भेळप...

मायड़ री खरी चूंदड़ी नै

बिसराय’र

अंग्रेजी रौ स्कार्फ ओढ लीनौ

मरुथळ री परंपरावां

रै गुमेज नै

घणी ठेस पुगाई है

आंकी बांकी संस्कृति अर

भासा री घोळ मथोळ

ठेठू राजस्थानी

दरस-दरसाव

नै घणौ लजायौ है।

स्रोत
  • पोथी : सुवालड़ी (राजस्थानी कविता संग्रै) ,
  • सिरजक : प्रमिला शंकर ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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