किता लोग अंया का हैं
जिका फकत आपकी ही सोचै
स्वार्थ तो बांकी नसा में
कूट-कूट कर भरेड़ो रवै।
फालतू की जिद
बिना बात को गुस्सो
बात-बात में गळती
भर-भर कै लालच
अर जद मन करै
कोई को भी
अपमान करणै में
पाछै कोनी हटै।
अै सब खुद करै जणां
कोई बात कोनी
अगर कोई दूसरो कर लेवै
तो बळ'र भूंगड़ो हो ज्यावै...
अर तन बदन में आग
लाग ज्यावै
भगवान ही बचावै
अंयां कै बिगड़ेड़ा सांडां सूं।