आंख खोली जद सूं बेजां ई सोहणी है डगळियै-डगळिये देव दूक दूक कै क्यूं थारी दुनियां मै भांत भांत का जिंदगी में टेम किता लोग अंया का है कोई सागै कितणी क्यां को तोरो बड़र्यो है माणस नै समझणो रात दिन एक करणो सारै दिन चपड़ चपड़ करै थे कितणा भी चीखो तोड़ भी ल्यासी