पड़दै रै आसूं पूंछ मती,
भावों रा भाखर ढह जासी,
अन्तै में आग उगळ मती
नैणां रो पाणी ढुळ जासी।
पांणत में डुबो पांणतियो,
मेहनत रा मोती पोवै है,
निपज्योड़ी खेती लाखिणी,
रलकों सूं लांठा ले जावै।
औढोड़ो फाटौ औढ़णियों,
घूंघट में ऊभी 'बा' देखै,
कमर में काठो कन्दौरो,
नागौ-सो ऊभौ कुण 'रोवै'।
आणै रा मार्ग बदळ गया।
खेती रा मालक करसा है,
साहूकारी संगत छोड दीनी
पढ़ लिखनै मोटा हुयग्या है।
साहूकारों सगपण हुयग्या है,
पगों री बदळी पंगडंडियौं।
बिखै रा दिनड़ा बीत गया,
हेलां पर हेला दीना है।
नैणां मे रातां घोळी है
पाणी सूं पतळो खून हुयौ
'औडी' में सूत्यै बालकियै
अंगूठा काठा चूस्या है।
मेहनत रो हुयौ मोल आज,
करसौं रे घर पर दीवाळी,
लिछमी रो पूजण टोक मती,
नैहरों सूं पाणी रळक्यो है।
भीणतौं रा गूंजै भाव अठै,
लैहराती खेती मुळकै है,
नाडयों में रमता नैनकिया,
पिणघट सूं बातां बुझै है।
धोरां सूं ढळता ढूळ देख,
गजबण रो घूंघट कियां उठै,
चूनड़ी रो साफौ बांध्योड़ौ
मस्ती रै मुळकौं कुण गावै।
बितोड़ी बातौं बूझ मती,
'ऊरभांणा' बाळक फिरता हा,
लीरौ दुयतौ लैरियौ,
घाघरियै गांठौ घुळियोड़ौ।
खोद्योड़ा खाडा भर दीना,
भावी रा लेखा भला किया,
दिया ज्यूं पाछा लेणा है,
जुल्मों रा घाव भरणा है।