मत फिरे उबाणी थमजा

बळबळती धरती छै पींदै

ऊपर छै तपतो असमान

तू कुणकै लेखे सह रही ताप

अगढाळ्या का नीम नीचे

बिछी अखोड़ी खाट गोडे

जक ले ल’ थोड़ी सी बार

पल दो पल एकाध घड़ी

ढल जाबा दे सूरज थोड़ो

कद तांई मेळ’गी ढेरया ऊपर

एक तार की तान

जेवड़ी काचा सूत की/अरी बावळी

तन ढकबा खातर ताणो

खुदको खुदनै भरणो रहै छै

क्यूं झीणी चादर गरमी की

फैला राखी छै

दूजां की आस आसरे!

स्रोत
  • पोथी : आंथ्योई नहीं दिन हाल ,
  • सिरजक : अम्बिकादत्त ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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