जद-जद ही हिम्मत हारौ तो इतिहास बदळतौ देखोला
जद-जद ही हिम्मत धारौ तो इतिहास बदळतौ देखोला
जितरो जहर जमीं में होवै, उतरो ही गिगनार झरै
जितरो इमरत आसमान में, उतरो धरती धार करै
जद-जद ही समझ सुजाण बणों, इतिहास बदळतो देखोला।
बै कुण हा, अर थे कुण हो, पूछौ आ बात कधांरा सूं,
ओ सोनो सांचौ, ओ खोटो, पूछौ बात सूनारां सूं,
जद-जद ही चढ़ौ कसोटी तो इतिहास बदळतौ देखो ला।
म्हे बतळाया थे नी बोल्या, थे बोलो म्हे सुणा नहीं
कहग्यौ कवि कबीर भायला, जोड़ नहीं तो गुणा नहीं
जद-जद ही समझै, ना समझ्या इतिहास बदळतौ देखोला।
ल्यो आवौ आपां बात करां, गई-गई सो गई-गई
वैवणियां आ सांची कैवै, नई-नई सो नई-नई
जद-जद ओ नेम निभावां तो इतिहास बदळतो देखोला।