जुग-जुग

म्हारा गीत

जे

थूं गावैला तो

सारै जग में

चावा हो जावैला।

भविस रै होठां रा

लोकगीत बण जावैला।

थूं अर म्हैं दोई

जुग-जुग तक

जीवंता रैवांला।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मदनमोहन परिहार ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
जुड़्योड़ा विसै