एकता पर कवितावां

उद्देश्य, विचार, भाव

आदि में एकमत होना एकता है। एकता में बल है। आधुनिक राज-समाज में विभिन्न आशयों में इस एकबद्धता की पुष्टि आदर्श साध्य है। इस समूहबद्धता का इतना ही महत्त्व शक्ति-समूहों के प्रतिरोध की संतुलनकारी आवश्यकता में है। कविता इन दोनों ही पक्षों से एकता की अवधारणा पर हमेशा से मुखर रही है।

कविता16

एकता नी शाल

महेश देव भट्ट

धरती रो रंगरेज

फतहलाल गुर्जर 'अनोखा'

रैवास

सीमा भाटी

जुग-जुग

मदनमोहन परिहार

भेळा में भगवान

बाल कृष्ण ‘बीरा’

पतियारो

शिवराज भारतीय

परवार

दीनदयाल ओझा

अहंकार छोड़ दे मानव

दिलीप सिंह ‘हरप्रीत’

संकल्प

श्रीमंत कुमार व्यास

भासा रो भरोसो

शिवदयाल पारीक

मायड़ भासा

महावीर जोशी

आ है जिद्द म्हांरी

मुन्नीलाल गैपाळ

मून

गुलाब चंद कोटड़िया

औजारां री बात

रमेश मयंक