अेक बार म्हारा में भाया घणी जोर की बणगी रे।
सिखायां में आ'र लुगाई बोटां में खड़ी होगी रे।
गांव रा कई नेता ल्या'र परच्यो दाखिल करद्यो।
हंसतो गातो जीवन म्हारो क्लेश घर में भरद्यो।
सरपंचां में खड़ी हुई तो माईक गूजं उठ्या सारा।
गांव-गांव में परचा भींतां पर मण्डग्या नारा।
छोरा-छोरी रा मुंडा पर मगनी बाई गूंज उठी।
विपक्षां री कमला देवी सुण नारां नै धूज उठी।
आख्यां जीं री मृगनयनी लाल गुलाबी-सा है होट।
चुनाव चिन्ह केला को, छोडो मगनी बाई नै दिज्यो बोट।
बार-बार खियो उणनै पण बात अेक न मानी है।
गांव री सरपंच बणबा री, बा मन में ठानी है।
फार्म उठावण री बारी में, बा बठां स्यूं भाग गई।
बड़ा-बड़ा खेतां री डोळ्यां इक झटका में लांघ गई।
म्हारी अेक न मानी बा, दूजै दिन तो पड़ग्या बोट।
बहुमत उणनै मिलग्यो भारी जीत गई डंका री चोट।
सपथ लियां बा सरपंचाणी बण, कुरसी पर जा बैठी।
अकड़ असी अमचूर हुई बा कुरसी माळै जा अैंठी।
कतरा ही भेड़िया बाट जो रिया, कद पंजा में आवैली।
जीव उबका रियो म्हारो भाया, कद घर पाछी आवैली।