लुगाई पर कवितावां

कविता156

सुभाव

अंजु कल्याणवत

आटा की चालणी

उषा राजश्री राठौड़

परायो धन

अनुश्री राठौड़

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

पी'र सासरौ

विमला महरिया 'मौज'

जगां-जगां

कमल रंगा

सबदां री हद रै मांय

आईदान सिंह भाटी

ओळूं घट की कस्तूरी

प्रेमजी ‘प्रेम’

घूमर

नारायण सिंह भाटी

लुगाई

उषा राजश्री राठौड़

देखणौ

पद्मजा शर्मा

पल्ला री गांठ

शकुंतला पालीवाल

रेत अर लुगाई

प्रेमलता सोनी

जोगमाया

तेजस मुंगेरिया

पिणघट करै पुकार

मान कँवर ‘मैना’

ओळखाण

मणि मधुकर

मौत

रमेश मयंक

मुळक

प्रियंका भारद्वाज

गांव री लुगायां

श्याम महर्षि

मां रौ नांव

महेश मोड़जी

म्हां लुगायां

शकुंतला पालीवाल

जूण जातरा

सुमन बिस्सा

नारी मरदाणी

हीरालाल शास्त्री

बळीतो

शकुंतला पालीवाल

वउ नी परबात

मणि बावरा

पूरण होवण री आस

अर्जुनदेव चारण

दुसासण

मणि मधुकर

सीता

अर्जुनदेव चारण

गांधारी

लक्ष्मीनारायण रंगा

लुगाई

बी. एल. माली ‘अशान्त’

सनेसो

गीता सामौर

पणिहारी

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

धूड़ थारै सिर में

कान्हा शर्मा

घर सूं भाजयोड़ी छोरी

पवन सिहाग 'अनाम'

सुण सेफाळी

तेजस मुंगेरिया

बात

मोनिका गढ़वाल

पिऊ पियै दारूह

देवकर्ण सिंह

प्रीत रो पराछीत

सत्यप्रकाश जोशी

पुराणी सासू नई बहु

भगवती प्रसाद चौधरी

सूंपड़ो

शकुंतला पालीवाल

परेम

बी. एल. माली ‘अशान्त’

चाँद अर बा

थानेश्वर शर्मा

वेलड़ी

शकुंतला पालीवाल