मिनख जमारै मत सड़ौ कचरै ज्यूं
धुंऔ बण धुंधलीजौ मत अर बिरथां उडौ मत
जे थै अगन हौ तौ गिगन नै छू लौ
हालौ, चमकौ मुगत जीव सकै लपट ज्यूं रूपाळ।
ताप थांरौ तेज देला दूसरां नै
भलै थारौ कमती है जीवणौ
धुंधलीजणौ कै सड़णौ बिरथां बकवाद
बरसां तांई सड़णै सूं कदै हुयौ है फायदौ?