मैं चुनाव में टिकट लेण खातर

गधा पारटी रै दफ्तर में गयो

अर टिकट खातर आवेदन पत्र धरियो

पण बठै रो सीन देख मेरो माथो चकरायो।

टिकट लेण खातर बठै ठाया-ठाया मिनख

अेक दूसरै रा घाबा फाड़ै था

अर आप-आप री दुलत्ती ही झाड़ै था।

मैं सोची दुलत्ती ही झाड़णी है तो

विधानसभा क्यूं–

गांव री गळियां के सांकड़ी है

उरै तो मोडा घणा

बैकुंठ सांकड़ी है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : ध्रुव कुमार सक्सेना ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
जुड़्योड़ा विसै