दानी डोकरी मां नै
दीखै कोय नी
पण,
उणां रो काम रुकै कोय नी
खाट सूं
आठ पावण्डा पे निपटण
पाँच पावण्डा पे स्नान करण री ठौड़
नाळ रा पन्दरा पगत्या चढ’र
दो पावण्डा अगाड़ी पे रसोई है
अबै कांई फरक पड़ै
दीखै नीं दीखै
चलको पड़ै
कन ओझको पड़ै
दानी डोकरी मां नै
मालूम हो जावै
दिन उगण री
बाछरू रै रम्भावण
गाय रो दूध काढ़ण
कप तश्तरी बाजण री
चाय आवण री
दानी डोकरी मां नै
मालूम हो जावै
टिफिन तैयार होयग्या
टाबर स्कूल जावैला
भायो स्नान-ध्यान सूं निपटताँ ई
रोटी बखत पे बुलावैला।
सिझ्यां बखत—
जद भायो दफ्तर सूं पाछो आवै
दानी डोकरी मां
उण रा पगां री आहट नै
पिछाण जावै
बोली सुण’र बतावै—कुण आयो?
दानी डोकरी मां नै मालूम पड़ै
उन्हाळा री, बरखा री, स्याळा री
काळ री, सुकाळ री
मिनखां री ...
बोल-बतलावण सुण’र
बता सकै कुण राजी है?
कुण बेराजी है?
दानी डोकरी मां नै टैम पूछो तो—
अन्दाज सूं बतावै
जो घड़ी री माफिक सही जावै
या कैवे—अबै आँख्यां किण में चावै?
अेक दिन—
जद म्हैं पूछ्यो तो बोल्या
इण जिनगाणी में इतरो देख लीदो
अबै कांई देखणो?
मन में कोई धावन्या कोयनी
फलती-फूलती बाड़ी में
रामजी राजी है
अबै नीं हरख उभावै
नीं गम सतावै
राम आसरै दिन ढळता जावै
जावण री घड़ी कनै-कनै आवै...