डगळियै-डगळियै नै देव मान ल्यो

सारै दिन स्याणै भोपां कनै जाकर

सर फोड़ो

पीर फकीरां की मजारां पर

जा-जा कर

गंडा ताबीज बणवावो

मोरा प्यावो

बूझा करवावो

झाड़ा-झपाड़ा करवावो...

अरे, बावळी बूचों!

जद अतो ही करो हो

तो एक बार

ईसवर पर भी बिस्वास कर कै देखो

थोथी बातां में के पड्‌यो है?

दिल सै

श्रद्धा भरिये मूंडै सै

रामजी को नाम तो लेय'र देखो

अर थोड़ी घणी देर ही सही

एक बार करमां की बही भी उलटो

जणा सारो समाधान मिल ज्यासी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बनवारीलाल अग्रवाल ‘स्नेही’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-44
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