अेक लप धान तातै पाणी में उकाळ

भूख जावै भूल टाबर टंक देवै टाळ।

टंक देवै टाळ तातै पाणी में उकाळ

भूख हाळी मार सूं अै गोडी देख ढाळ।

अेक लप धान तातै पाणी में उकाळ

काळजै री कोर लेवै हिचक्यां रा हिचका।

रोम रोम कांपै, उठै छाती में उबाल

रूखो सूखो टाबरियां नै बेगी बेगी घाल।

बातां रो कर चूरमो थ्यावस हाली दाळ

अेक लप धान तातै पाणी में उकाळ।

रैयो कोनी मानखै रांड होगी आण

आदमी री भूल गयो आदमी पिछाण।

देख-देख दोगली जीभां री झिकाळ

तनड़ै मांय लाय लागै हियै मांय झाळ।

अेक लप धान तातै पाणी में उकाळ

पीळो पड़ग्यो मानखो धोळी होगी आंख।

पोर-पोर सांस लेवै हियै हाळी पांख

काळ आयो सूमड़ो अर दाता री काळ।

चेत-चेत मानवी जूणी नै रूखाळ

अेक लप धान तातै पाणी में उकाळ।

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : अब्दुल वहीद ‘कमल’ ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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