आज री भोर
म्हैं पढ़ी
सूरज री किताब।
म्हारै पोर-पोर में
सौ-सौ सूरज रो उजाळो
घर करण लाग्यो है।
पैलां तो म्हैं डर्यो हो,
पण अब मन रस्तै में
आग्यो है,
चौकड़ी भरतै हिरण ज्यूं
मन दौड़ण लाग्यो है,
घर में गूंज रह्यो है
बच्चां री किलकार्यां रो
सुहाणो संगीत
सांची कैऊं
सूरज री किताब
पढ़ण रै बाद
म्हैं लगातार
जाग र्यो हूं
लगातार..।