पुस्तक पर कवितावां

पुस्तकें हमारे लिए नए

अनुभव और ज्ञान-संसार के द्वार खोलती हैं। प्रस्तुत चयन में ‘रोया हूँ मैं भी किताब पढ़कर’ के भाव से लेकर ‘सच्ची किताबें हम सबको अपनी शरण में लें’ की प्रार्थना तक के भाव जगाती विशिष्ट पुस्तक विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता17

वीरो

यशोदा दशोरा

नान्ही कवितावां : आओ सोचां

सुरेन्द्र सुन्दरम

कोई बांचौ

रवि पुरोहित

पोथी रो पाठ

कृष्णा आचार्य

थारै नांव री पोथी

अनिला राखेचा

पोथी अक्षर, ग्यान समंदर

बिहारी शरण पारीक

डायरी

रूप सिंह राजपुरी

घणी अबखाई है

नीरज दइया

पांडुलिपि

महेन्द्र भानावत

जी करै म्हारो

संजय पुरोहित

सूरज की किताब

प्रेमचन्द्र गोस्वामी

पर्यायवाची शब्द

ब्रज नारायण कौशिक