कळी-कळी घूंघट सूं झांकी
बहक गई कोयल काळी।
आडो ऊंळो, अज मतवाळो,
नाच्यो वाव दियां ताळी।
गोरी-गोरी, कंवळी-कंवळी, कळियां में कुण मुळकै है।
गोरी गावै, जन-मन थिरकै,
महकी सरसूं री क्यारी।
ठूंठ सरसग्या, फूल बरसग्या,
जोबन री छिब है न्यारी।
होळै-होळै हरवळ-हरवळ, कुण अमराई महकावै है।
हियै गिलगिली, भोळी भंवरी
बहकै गुण मुण गावै है।
चटक-मटक अर चहक चुल बुली
तिरलोकी नै भावै है।
छानै छानै, छम्मक-छम्मक, घूघर कुण घमकावै है।