(अेक)
चाय पी कोई नै
कोई नै जरदो खायो
बच्या ज्यांनै बीड़ी सुळगाई
फेर उडी फटकारां
जाणै रेत मं रमबा लाग्यो पाणी।
(दो)
सुणो
बात तो सुणो
जचै तो मानज्यो
पण
सुणो तो सरी
सुणबा मं कांई जा रयो छै।
(तीन)
सुणी बात अर फंस्या
करी बात अर मर्या
(च्यार)
बातकी बात मं
बात करबा हाळो
बात मं सूं बात काढल्ये
बात नं क्हांसूं क्हां लेज्या
अर अखीर मं
जींको मतलब कढै
बात नं बात को नांव
बलिहारी छै असी बात की।
(पांच)
बात की बात प याद आई एक बात
क बिना बात की बात प
होगी अतनी बात
एक बात छै, ईंको नांव कांई
कांई क्हछै जीसूं
चालो पड्योरा जाबा द्यो
अब कांई तो क्हो अर कांई सुणो।
(छह)
सुणै नं सुणै कोई
आप तो क्हो
तोल पड़ज्यागो
स्वाद जिन्दगी को बी
थोड़ा घणा दिन
म्हांकी लार तो रहो।