मजलिस आज उदास घणी क्यूं

उण सुपनां री ल्हास बणी क्यूं

रोही राती तपै तवै ज्यूं

सूनी बाटां बात छणी यूं

सो उजास ढोयो अंधारो

फूली करड़ी नागफणी यूं

इण नाडी रो सड़ग्यो पाणी

बायरियै बीच बास घणी यूं

पगडांड्यां परड़ोटा ताकै

भातेरण अणमणी घणी तूं।

इण ढूंढा री छात कठै गई

रूपाळी सौगात कठै गई

नरम चांदणी घणी खिलैला

साजी-सूरी रात कठै गई

‘करै निवेड़ो निरधनता रो’

उण पीरां री बात कठै गई

रूळा डांगरां पौळछ भेळै

पंचा री जमात कठै गई

नीर-खीर रो न्याव चुकाता

उण हंसलां री जात कठै गई।

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : कल्याण गौतम ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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