अजलक नीं समझै
पाणी
प्यास नै,
अजलक उडीकै है
अंधारो
उजास नै,
पण आंख्यां री
ओटां सूं
फेरूं आवती दीखै
वा ईज
काळी कलूटी रात
अजलक
रातां नै ढोवै है
अजलक
पीला सूरज री
बाटां जोवै है
किरणां सूं
मिलवा नै कळपै
अजलक
गागर ज्यूं छळकै
मनड़ै रो
उदास, कुम्हलायोड़ो
बंद सूरजमुखी
अजलक।