म्हनै सीख देवण सारू
सदा सूं उतावळा
आप रेवौ हौ
अर कैवौ हौ—
वौ इज लिखौ
जिणरी मांग
बखत अर मौकै री गैरी
जोड़तोड़ करै
आ इज अकलमंदी है।
वा नीं कैवणौ चाईजै
जिणनै म्हारी आंख्यां देखै है।
कान जिणनै सुणै
वौ सगळौ बिन मतळब रौ है...
पण, म्हानै आ ठा है
जे म्हैं इण भांत करूं
तद फेरूं अेक दिन
आप आवौला; इतरौ आंधौ-बैरौ
म्हैं कीकर व्हियौ
इणनै लैय'र एक
लाम्बौ भासण
म्हानै पावोला।