म्हनै सीख देवण सारू

सदा सूं उतावळा

आप रेवौ हौ

अर कैवौ हौ—

वौ इज लिखौ

जिणरी मांग

बखत अर मौकै री गैरी

जोड़तोड़ करै

इज अकलमंदी है।

वा नीं कैवणौ चाईजै

जिणनै म्हारी आंख्यां देखै है।

कान जिणनै सुणै

वौ सगळौ बिन मतळब रौ है...

पण, म्हानै ठा है

जे म्हैं इण भांत करूं

तद फेरूं अेक दिन

आप आवौला; इतरौ आंधौ-बैरौ

म्हैं कीकर व्हियौ

इणनै लैय'र एक

लाम्बौ भासण

म्हानै पावोला।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : अलेक्सान्द्र त्वारदोवस्की ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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