मरणौ तो अटल है भाया

दुनिया में क्यूं छळ है भाया

झूठ थानै ले डूबैला

सच रौ मीठौ फळ है भाया

हंसी-खुशी गुजार दिया

कितरा सुहाणा पल है भाया

धड़ा बणायां कांईं मिलसी

अेकता में बळ है भाया

बातां म्हारी काम आसी

आज नीं तो कल है भाया।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : अब्दुल समद’राही’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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