साच पर ग़ज़ल

ग़ज़ल14

बिणजारा

हरफूलसिंह ‘रसिक’

चोरी रो धन धूड़ भायला

जेठानंद पंवार

साच समझाव अठै

लालदास 'राकेश'

वागडी ग़ज़ल

छत्रपाल शिवाजी

विडरंगा सपना है आंख्यां रो साच

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

जूण भलां खुसियां सूं भरलै

अब्दुल समद ‘राही’

मरनौ तो अटल है भाया

अब्दुल समद ‘राही’

कन्या हुयां धरम भी होसी

बिहारी शरण पारीक

मिनख तो दीखै कठै अब

शिवराज छंगाणी