भींत में जड़ियोड़ो, चौखट सो आदमी,
गण्डक को मोल है, पण फोकट को आदमी।
बाईस अर चौबीस का जमाना बीत गया,
आजकल तो चवदा केरट को आदमी।
गरज पड़ै तो चींचड़ा ज्यूं, गाढ़ो चपट जा,
चमचा पै लाग्योड़ी, चींगट सो आदमी।
जीवण री आपाधापी, अर खींचाताणी में,
योजना रा कागद पै, सलवट सो आदमी।
भूखै पेट ऊबो, है अन्धारो ओढ्यां,
सूनै घर में गारै कै दीवट को आदमी
सिक्कां री टकसाल में सब भावना ढळगी,
बिना दिल को खोखलो, सीमंट को आदमी॥