मानवजगत पर ग़ज़ल

ग़ज़ल3

न हो तिल बी जघां भी झाड़

भागीरथसिंह भाग्य

आदमी

राधेश्याम मेवाड़ी

थे तो हद सूं ई बध गया जी

पुरुषोत्तम 'यकीन'