थांरै होठां मुळक थिरकती आछी लागै

दरपण सामी रूप निरखती आछी लागै

उठती झुकती काजळ सूं कजरारी पलकां

राती टीकी भाल भळकती आछी लागै

भोर उगाळी पंछी बोलै बैठ डागळै

ऊभी झरतां केस झटकती आछी लागे

कर सोळै सिणगार ओढ़णी झींणीं ओढ्‌यां

बिछियां पायळ पगां ठुमकती आछी लागै

मैंदी रचिया हाथ महावर रची पगां में

चौकस निजरां छात उतरती आछी लागै

जळ जोबन सूं भरी बादळी आभै उडती

पाय पून रो परस बरसती आछी लागै

पिव परदेसां याद हियै में देवै हबोळा

फुर-फुर डावी आंख फरकती आछी लागै

तन्नै कांई आछो लागै तूं जाणै

तूं ‘शंकर’ नैं सदा हरखती आछी लागै

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शंकरलाल स्वामी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-34
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