कात्यो कर्‌यो कपास भायला

मन रो मिट्यो मिठास भायला

चेहरे पर नीं पाण वापरी

बीत्या बरस पचास भायला

म्हूं कूअै रो रह्यो डेडरो

तूं होग्यो आकास भायला

च्यारूंमेर धुंवौ गंधावै।

गुमग्या बाग सुवास भायला

बर्‌फ तळै दबग्यो लागै है

रिस्तां रो गरमास भायला

जीवण रै अळिये मारग में

कुण है कुण रो खास भायला

राजनीति जिण नै कर लेवै

वां रै नित मधुमास भायला

हियो पतीजै कियां ‘लाल’ रो

जद उठज्या विस्वास भायला

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शंकरलाल स्वामी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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