काख में बिस्तर कठै हा, हाथ में बच्चा कठै हा

कै नै तसवीरां दिखाता आईना साच्चा कठै हा

ईं तर्‌यां सै सहम री ही, धूप में परछाईयां

धुंध गळियां में भरी ही, रास्ता आच्छा कठै हा

नफरतां री आग में जळ कर मर्‌या राम-रहीम

ईं तर्‌यां तो कदै भी संबंध यूं कच्चा कठै हा

धरम री तलवार ही और हादसां रो हो हुजूम

बेखबर आपां रैया या रहनुमां आच्छा कठै हा

धरम री ले आड़ मिनखा जूण नै काटी गई

प्रार्थना तो साचली ही प्रार्थी साचा कठै हा।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मधुकर गौड़ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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