औ कांई हुयौ कैड़ी नज़र देख र्यौ हूं कै नै फुरसत है, कुण आवैगो काख में बिस्तर कियां होई रपट है, के पूछर्या हो आप न घर री बात करी म्हे तो न दर री बात करी म्हे तो रात तो अेकलपणै री अेक गरदिस ही तो है सोच रो वातावरण गंदो हुयो है थोड़ै सबदां में