ग़ज़ल8 औ कांई हुयौ कैड़ी नज़र देख र्यौ हूं कै नै फुरसत है, कुण आवैगो काख में बिस्तर कियां होई रपट है, के पूछर्या हो आप न घर री बात करी म्हे तो न दर री बात करी म्हे तो
दूहा5 काळी पीळी हो रई, अब पाणी री धार मैना कोयल टीस री सूई धागौ लड़ पड़्या, चादर होई बेहाल संकल्पां रै हाथ रो साधारण सी हो गई, वचन भंग री बात