चौड़ै-धाड़ै चालै बन्दर बाट छै
लुच्चा गुण्डा का ऊंचा ठाठ छै
धन्ना जी कै गादी तकिया रेसमी
होरी कै घर वाही टूटी खाट छै
काली, पीळी, धोळी टोप्यां टांक ली
टोप्यां नीचै सबकी गंजी टाट छै
अेक तीर वा बैठी दूजै तीर म्हूं
बीच्या मं नदी को चौड़ो पाट छै
बेगो-बेगो भर ले थूं भी पोटळो
सस्तो सोदो कर ले उठती हाट छै
सूरज, चांद, सितारा लाओ तोड़ कै
कोई बैठी न्हालै म्हारी बाट छै
अपणी तागत न जाणै तू ‘भाईला’
वरना तू तो दुनिया को सम्राट छै।