लोग जो मद में चूर हुया
सबी का मन सूं दूर हुया
रूंख तूफां में खड़्या रह्या
नमन जिणनै मंजूर हुया
प्रेम रै आगै झुकबा नै
तखतसाही मजबूर हुया
रगत सूं रण में लिख्या गया
सबी किस्सा मसहूर हुया
पराये हित जीबा आळा
सबी आंख्यां रा नूर हुया
सूर कै आगै कवि कुल में
बताओ कितणा सूर हुया
सीस पर उणनै जगां मिली
मांग री जो सिंदूर हुया