अहंकार पर ग़ज़ल

यहाँ प्रस्तुत चयन में

अहंकार विषयक कविताओं को संकलित किया गया है। रूढ़ अर्थ में यह स्वयं को अन्य से अधिक योग्य और समर्थ समझने का भाव है जो व्यक्ति का नकारात्मक गुण माना जाता है। वेदांत में इसे अंतःकरण की पाँच वृत्तियों में से एक माना गया है और सांख्य दर्शन में यह महत्त्व से उत्पन्न एक द्रव्य है। योगशास्त्र इसे अस्मिता के रूप में देखता है।

ग़ज़ल3

बड़ा लोग है बात बड़ी

मनोहरलाल गोयल

किण माथै इतरावै भाया

मनोहरलाल गोयल

लोग जो मद में चूर हुया

कुंदन सिंह 'सजल'