नैण-बादळी बरसै, बीजळ हिवड़ै में नीं नावड़ै
कोल करो पूरा आवण रा, सावण में नीं आवड़ै।
प्राण-मिंदरियै में गावै है, गीत अलूणा पीड़ रे
रोणी सूरत राग रागळ्यां री लागै नीत भीड़ रे
संगळियां सुर साथ निभावै, समदर रो जळ काढ़ रे
नेह-नदी में इण विध आवै पिया, विरह री बाढ़ रे
बुध जावै तो सुध आ जावै, सुध जावै, बुध बावड़ै
कोल करी पूरा आवण रा, सावण में नी आवड़ै।
अंग री अगन बुझण दे कोनी, सिलगावै दिन रात रे
चेतै आवै जद-जद कोई भूली बिसरी बात रे
गळो गळगळो होवै, छेड़ै दरदीली-सी तान रे
मोर, पपैया, दादर, सगळा, सुणै लगा कर ध्यान रे
कठै न दीठै छांव, बळै है थारी मरवण तावडै
कोल करो पूरा आवण रा सावण में नीं आवड़ै।
रात्यूं जुड़ै सपन रा मेळा, सुधियां घूमै झूमती
सपना सांचा होय पिया तो मैं सुधियां नै चूमती
मेळा तूटै नैणा बूठै, तूठै आंसू सेज नै
थामी थमै न थ्यावस खावै कियां पकड़ल्यूं जेज नै
तातल घुड़लै चढ़-चढ़ भाजै, पगला मेल’र पांवडै
कोल करो पूरा आवण रा सावण में नी आवड़ै
मन रै मरवै नैं मैकावै, आ सावण री पूनड़ी
सोरम नै सिणगारै बैरण, आ रिमझिम री चूनड़ी
सांसा सूं ले घूटण उकळती उमड़ी आवै बादळ्यां
बरसै मूसळधार भरीजै भीजै सगळी अळ्यां-गळ्यां
पिया छोड परभोमी पूठा आवो थारै गांवड़ै
कोल करो आवण रा पूरा सावण में नी आवड़ै।