बैरण बांसलड़ी रा बोल!
गया मरम में म्हारै उंडा
रस-विस दोन्यूं घोळ,
बैरण बांसलड़ी रा बोल!
अेक फूंक दी गयी भायली
मन बिनरावन डोल,
उफण बही जमना नैणा सूं
भीज्या कूल कपोल,
बैरण बांसलड़ी रा बोल!
खावै हेत हबोळा जाणै–
समदरियै री छोळ,
मोबी, किंयां सनेसो भेजूं
मैं तो हुई अबोल,
बैरण बांसलड़ी रा बोल!
सुध-बुध साव बिसरगी, लागी–
सहज समाधि अमोल,
मिली चेतणा चेतण स्यूं जा
द्वैत किंवाड़ी खोल,
बैरण बांसलड़ी रा बोल!