चंदा-सो थकियो मुखड़ो, बोराई आंख्यां लागै

नैणां रै काजळ बदळै, बादळ काजळिया आगै

सावणियो भल सरसायो, पपैया तूं कै बिलमावै।

काजळ-सी रातां दीठै, आंसू सूं पाती लिखद्‌यूं

उड़ दे पतरी पिव नै, दे रै पिव नै पतरी

मोर्‌या ज्यूं आंसूं खोवै, ओळूं काजळियो धोवै

रातां-परभातां डागळ उभी मारगियो जोवै

बादळियो घर्‌ररायो पपैया के पिव-पिव गावै।

मनड़ै री बातां कैद्‌यूं आंसू सूं पाती लिखद्‌यूं

उड़ दे पतरी पिव नै, दे रे पिव नै पतरी।

नखतां री बूंदां चकवी चकवै बिन कोनी पीवै

बिन जोड़ी बुगल्यां किणविध बोलो, अेकलड़ी जीवै

चालै भीज्यो बायरियो, बेळा मिलणी उकसावै।

पिवजी नै जाय बंचाज्यै, आंसूं सूं पाती लिखद्‌यूं

उड़ दे पतरी पिव नै, दे रे पिव नै पतरी।

आंख्यां सावण री बावण, टूटी पाळां कोळां री

तीजण-नूहेल्यां देखूं, कळपै रागां ढोलां री।

मनड़ो घायल हो आयो मेंदी मन कळपावै

बिजळी बैरण बणगी, आंसू सूं पाती लिखद्‌यूं

उड़ दे पतरी पिव नै, दे रे पिव नै पतरी।

स्रोत
  • पोथी : ओळमों ,
  • सिरजक : बंशीलाल ‘बेकारी’ ,
  • संपादक : किशोर कल्पनाकांत ,
  • प्रकाशक : कल्पना लोक प्रकाशन रतनगढ़ (राज.) ,
  • संस्करण : सितम्बर
जुड़्योड़ा विसै