ऊंचा-नीचा टीबड़ा, बाळू चिण्या मकान।

बै’ई पगला चढ़ सकै, जिणरी रग में ज्यान॥

टेडा-मेडा टीबड़ा, बणिया कींकर देख।

अळचै माई मरुधरा, चोखो धार्‌यो भेख॥

काचा-कोरा टीबड़ा, ना चोटी ना बाळ।

सूंड-मुंडाई टीबड़ा, बैठ्या काड्यां खाल

कदै अकासां कदै पताळां, फिंच्यां करै चिंचाट।

सेखी काढै़ टीबड़ा, ओखी आं’री बाट॥

टीबां-टीबां बेलड़्यां, नागण रैयी फुंफाय।

लूबा-लूबा पानका, सावण दियो सजाय॥

पीळा-पीळा काकड़ा, छिबकैदार-सरूप।

टीबां बैठ्या खांवतां, भरै पेटड़ा भूप॥

टीबै अड़ूबो रोपियो, हांडी अड़ूवै ताज।

बिन्या जीव’रो ढांचळो, खेतां आवै काज॥

टीटण-भूण्डा, भूंण्डिया, ठण्डी रेत बिछाय।

टीबां चित्र कोरिया, पगलां कलम बणाय॥

टीबां-टीबां राहड़ा, ढळै कसूती ढाळ।

भातां री-भतवारण्यां, भाजी बगै पताळ॥

मोटा टीबा पहाड़-सा, दीसै फिरता जीव।

मारू आंख्या फाड़ री, कद आवैला पीव॥

मूसळधारां मेवड़ो, टीबा कट-कट जाय।

डहरां बणी तलाबड़ा, पंछी पीवण आय॥

डूंचो ऊंचो मांड नै, कस्यो टीबड़ां पोत।

हाथां सीटा मोरता, कथर्‌या साचा कौथ॥

कुतड़ा झिरकी काटर्‌या, धिस-धिस बणरी रेख।

हाडी चूसै गिरजड़ा, सूनौ टीबो देख॥

टीबां बाळू रेतड़ी, घाली अबखी बाण।

पांख्या मारै चिड़कल्यां, कर’री टीबां न्हाण॥

गाम बसायो टीबड़ां, टीबां जाम्या पूत।

फूट्या गळबा ठीकरी, टीबां पड़्या सबूत॥

पाळी रेवड़ थाम नै, गधां उतारी लोट।

टीबां बाळै भींटका, जबरा सेकै रोट॥

चौमासै री रातड़्यां, टीबां रमगी सील।

बाजरआळी पूंजळी, चौवै गीलम-गील॥

नूवीं-नूवीं बिनण्यां, टीबै बरणो गात।

बळखाती-सी चढ़ै टीबड़ां, निरखै मरूधर भात॥

पळ में टीबा स्यांत सा, पळ में रांपटरोळ।

नूळा चालै रेत रा, टीबां रो रमझोळ॥

पाळै मूण्डो काडियो, आई टीबड़ां स्यांत।

धूजै हाथ किसान रा, कट्ट-कट्ट बाजै दांत॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बिशनाराम स्वामी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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