आखी दुनिया री निजरां आं दिनां ईरान अर अमरीका रै बीचाळै चालतै जुद्ध माथै है। कुण किणरा कितरा मिनख मार्‌या, अखबार अर टीवी रा अै सबसूं महताऊ समाचार बण्योड़ा है। इणी बगत अेक खबर है कै जैसलमेर रै अेक छोटै’क गांव दबड़ी रा रैवासी सूफी कलाकार सावण खान नीं रैया। घणकरी दुनिया सारूं अेक सामान्य घटना सूं वधीक कीं नीं है, पण अेक भोत छोटो'क समाज है, जिणरै खातर इणसूं खोटी अर खारी खबर दूजी व्है नीं सकै। पाकिस्तान सूं आयोड़ा धाटी, मुलक रै सींवाड़ै माथै रैवणियां सिंधी मुसळमान अर मांड खेतर रा रैवासियां सारूं सावण रै जावण री खबर खामेनेई री मौत सूं घणी माड़ी अर दुखद घटना है।

खामेनेई शियावां रो धार्मिक अंतरराष्ट्रीय नेतो हो। इणीज भांत सावण म्हांरो अंतरराष्ट्रीय गवैयो हो। आं रो जलम सन् 1960 में जैसलमेर में व्हियो। सावण खान मांगणियार जाति सूं आवै, जिका पीढियां सूं गावण-बजावण रो इज काम रैया है। लोक में अेक कैवत चालै कै मांगणियार रो टाबर रोवै सुर में है। मांगणियार सुर अर साज री सीख मां रै पेट सूं साथै लेय’र जलमै। सावण खान री बात माथै आवण सूं पैलां आपां थोड़ी'क बात उतरादै भारत अर खास तौर सूं राजस्थान अर सिंध री संगीत परंपरा माथै कर लेवां। म्हारा अेक संगीत रा जाणकार दोस्त रवींद्र सा कविया बतावै कै पंजाब, राजस्थान सिंध आद रा जितरा भी गवैया आपां जाणां, वां में घणकरा नाम मिरासी समुदाय सूं ताल्लुक राखै। अठै सुण्या जावण वाळा मुसळमान गवैयां में मोहम्मद रफी साब नै छोड़ देवां तो बाकी रा सगळा मोटा नाम मिरासी समुदाय सूं इज आवै। व्है सकै वां नै न्यारी-न्यारी जगां न्यारा नाम सूं जाणता व्हैला। उस्ताद मेहदी हसन साब, उस्ताद नुसरत फतेह अली खान साब, उस्ताद गुलाम अली साब, रेशमा आद घणा नाम है, जकां रो खानदानी काम गावण बजावण रो रैयो है। बात सोच’र घणो दुख होवै कै मिरासी समुदाय नै लेय’र आपणै समाज रो रवैयो घणो भूंडो है।

खैर बात करां सावण खान री तो वां रो घराणो ठेठू सूफी है। सावण खान नै गावणो विरासत में मिळियो। उण टैम सावण खान रो आधो परिवार पाकिस्तान रैवतो अर सींवां माथै घणी सख्ती नीं हती तो सावण संगीत सीखण नै आपरै भाइयां रै उठै गया। उस्ताद भीखे खान सूं वां संगीत री तालीम लीवी। भीखे खान अर सावण रै बियां तो काकाई भाई रो रिस्तो, पण सावण खान वां नै हमेसा उस्ताद इज कैयो। उस्ताद भीखे खान सूफी रा मोटा रायबी रैया। सावण खान रा बेटा शौकत खान सूं म्हारी बात हुई तो वै बतायो कै उण टैम में भीखा खान रै जेड़ो कलाम लिखण अर गावण आळो दूजो कोई नीं हो। सावण खान रा गायोड़ा कई कलाम लिख्योड़ा भी वां रै उस्ताद रा इज है। 1971 री जंग सूं पछै बॉर्डर माथै सख्ती बढण लागी तो सावण पाछा आय गिया। शौकत बतावै कै सावण रा उस्ताद घणा सख्त मिजाजी हा। पूरो दिन सावण खान कोयला री बोरियां उठावण में उंवानै मदत करवाता जद जा’र आथण रा संगीत री तालीम मिळती। जद आपां कह सकां कै सावण खान रा उस्ताद वां नै कोयलां री खाण सूं तरासनै हीरो बणायो हो।

सावण खान खुद अेक इंटरव्यू में बतावै कै उंवारै मोरां में चिमटा री सैंनाणी है, वा उस्ताद री दिनोड़ी है। वै चिमटै रा निसांण वां री संगीत री डिग्री ही, जिणनै सावण ता-उम्र सांभे राखी। उस्ताद नै सावण खारा नीं लागता पण भाटै माथै कारीगर रा हथौड़ा, छैणैं लागै जद जा’र वो मूरत बण पूज्यो जावै। उस्ताद रो मानणो हो कै सावण तू मूंडै सूं गावै है, पण कलाम री आवाज हिड़दै सूं, अंतै सूं निकळणी चाइजै।

सावण खान रो आधो परिवार हिंदुस्तान आय गियो अर आधो उठै इज रैयो। सावण खान रै मन में इण बात री घणी पीड़ रैवती कै आधो परिवार पाकिस्तान रैयो अर पीड़ घणी इण वास्तै भी ही क्यूंकै उंवारा उस्ताद भी पाकिस्तान इज रैया। सावण रै परिवार माथै सोढा राजपूतां रो हाथ है, जिका कालांतर में इस्लाम अपणाय लियो। इणी वास्तै आप देखोला कै सावण खान कदैई रंगीन पोतियो अर तेवटो (बाड़मेर-जैसलमेर में पैरीजण आळी विसेस धोती) नीं पैरता। वांरौ कैवणो है कै’ असीं राज रा दिनोड़ा गभा अनै पाग नीं बदळे सका’ मतलब म्हे राज रा दियोडा गाभा अर पाग नीं बदल सका। चूंकि बॉर्डर खेतर रा मुसळमान सफेद साफो अर बिना लांग री लूंगी पैरै, तो सावण खान भी वो इज पैरवास राखता। सावण खान री इण संगीत जातरा में उंवारै जजमानां रो महताऊ सांगो रैयो।

सावण खान कॉक स्टूडियो में गावण आळा राजस्थान रा पैला कलाकार है। आप लगैटगै 60 सूं बेसी मुलका में सूफी संगीत रै हवालै सिंधी, सराइकी अर धाटी-राजस्थानी भासावां नै आबाद राखी। सावण खान में कई बातां है, जकी वांनै दूजा स्टेज कलाकारं सूं न्यारा राखै। आजकल स्टेज कलाकारां कनै गिणती रा 10 गीत है, जिका फिक्स है। उंवारै दोहराव सूं इज कलाकारां रो काम चालै। सावण खान रो मामलो अठै अलग है, वांनै न्यारी-न्यारी लोक बोलियां रा केई गीत याद हा। सावण खान री भासा अर बोलियां माथै जबरी पकड़ ही। फॉक म्यूजिक माथै काम करण वाळा साथी संदीप बतावै कै कोमल कोठारी जद कदेई पाकिस्तान रो दौरो करता तो सावण वांरी प्राथमिकता में रैवता, क्यूंकै पाकिस्तान में जा’र गावणै वास्तै सुर रै सागै आखर अर समझ भी जरूरी सरत मानीजती अर सावण आं तीनूं चीजां में खरा उतरता।

सावण जद ‘डोरो’ गावता तो ठेठ धाटी, ‘मिठीया मेहमान’ गावतै टैम उंवां माथै मांड मारुआड़ हावी रैतो, ‘रंग ही रंग बनाया’ जेड़ा कलाम गावता तो सराइकी रा उस्ताद लागता अर पछै ‘उमर मारवी रा किस्सा’ नै गावता तो सिंधी में रम ज्यावता।

सिंध रै लोक री प्रेम-कथावां में वांरी बेसी रुची ही। ससूई-पुन्नू, उमर-मारवी, मूमल-महेंद्रा आद रा गीत वै घरे रैवता जद भी गावता इज रैवता। सावण आपरै कंठां रै हवालै सूं गुलाम फरीद, बुल्लेशाह जेड़ा सूफी संतां नैं गाया, विस्थापितां रो दुख गायो, मुहब्बत में ससूई-पुन्नू रा किस्सा गाया। जका मिनख हैदर नै नीं देख सक्या, उंवां खातर सावण इज हैदर। म्हारा जेड़ा जका टाबरां रो जलम दंग (सरहद) रै अठीनलै पासै व्हियो है, उंवा रै वास्तै सावण दंग पार री संस्कृति हा। बीकानेर रै खाजूवाळै सूं ले’र बाड़मेर-बाखासर तांई लगैटगै 500 किलोमीटर रै भांईकै में अेक जमानै सावण री धाक रैई। हळ खड़तां टैक्टरां माथै सावण आपरै ऊंचै साद में उगेरै ‘रातब मिंहड़ा वुट्ठा, खिंवणल खेलड़ किया’ अर ट्रैक्टर रो ड्राइवर झूमण लाग जावै। सावण ‘चिरमी’ गावै तो बाई रै आंखै— अेक सावण, बीजी भाद्रवो!

यूं तो सावण रै कंठां निसर्‌यो हरेक गीत अमर इज रैयो, पण कुछेक गीत वांरा घणा वायरल रैया जिकां में ‘इंतजारी में गुजारी’, ‘रंग ही रंग बनाया’, ‘हाईवे’ फिल्म रो ‘तख्त छडायो हीर’ आद सामल है। वांरा केई गीत म्हनै निजी रूप सूं घणा वाल्हा है—‘कलंगी वारो कोट’, ‘कांगली ती उड़े’, ‘ओडीड़ो उखणें’ आद।

दोय मोटै मुलकां री सियासी कळह सूं अठै-उठै बिखर्‌योड़ा म्हां धाटियां अर सिंधियां री ओळखाण आं कलाकारां रै पांण इज बचियोड़ी है। कांटाळी तार रै ओळै-दोळै बैठोड़ा रोही रा रैवासियां कनै आपरी ओळखांण रै नांव माथै इत्तो इज धन बच्योड़ो है। बॉर्डर रै उण पासै हैदर रिंद, माई भागी, माई धाई, जलाल चिंदीयो आद व्हिया अर इण पासै सावण खान, बादळ खान केलणोर, बीजळ खान। दोनां कानीं रा फनकार आपरै लोगां सूं मिळण तो नीं आ-जा सकै, पण वांरी आवाज वीजा अर पासपोर्ट री कदैई मोहताज नीं रैई। वा बॉर्डर नै कीं नीं गिणै। तारां रा झपीड़ बजाती आवै अर कानां रै मारग सूं सीधी सुणणियां रै हिड़दै तक पूगै। आज रै टैम अैड़ा कलाकारां रो घाटो पड़ गियो है। रोजी-रोटी री मजबूरी वां नै स्टेज कलाकार बणन सारूं मजबूर कर दिया है, जका च्यार गीतां रो रांफा-रोळो करै अर आपरो टैम पास करै। इणमें कलाकार रो कोई दोस कोनी। आपां रो दोस है कै आपां उंवानै, उंवारी कला रो मेहनतानो नीं दे सक्या। मांगणियार समाज री जमीनी हालात घणी भूंडी है। बात लिखतां घणी सरम अर दुख हुवै, पण केई मांगणियार परिवारां कनै माथो घालण सारू छात कोनी है। समाज दिनों-दिन स्वारथ में डूबतो जावै अर गरीब री हालत नित माड़ी होवती जावै। आपां कितरा निरलज्ज हां कै जिण कलाकारां नै स्टेज माथै सुणता वांरा बखाण करता फिरां अर स्टेज सूं आउट होयां पछै वांरी कोई सार संभाळ नीं लेवां।

केई कलाकार है, जकां रो अेक टैम सिक्को चालतो हो अर बखत रै फेर सूं आज वै गुमनामी री जूंण जी रैया है। चम्पे खान आपरै टैम सिखर माथै हा, आज वै बीमारी सूं जूझ रैया है, वांनै तबीयत पूछण जेड़ा नीं रैया आपां। कुटळ खान देवड़ा मांगणियार गायकां में अेक मोटो नाम रैयो, पण हमैं वै किण हालत में है, आपां नीं जाणां। खुद सावण खान आपरी उम्र रा छेहला दिन घणी अबखाई में काढ्या। मुकम्मल इलाज रै अभाव सूं वांरो निधन होयो। दप्पू खान साब राजस्थान पर्यटन उद्योग रा ब्रांड एंबेसडर जेड़ा हा। सरकार वांरी फोटवां आखै राजस्थान में छापती ही, पण वां रै सुरगवास रै टैम तक वां कनै रैवण नै आसरो नीं हो। जगत भर में मांगणियार संगीत नै आपरै गळै सूं अमर करणियां हरदिल अजीज सुरगवासी भाई मांगे खान रा भी अै इज हाल रैया। मोटा-मोटा कॉन्सर्ट आयोजक इण निरमळ-निसछळ कौम रो कितरो आर्थिक सोसण करै, इण विसै माथै अलग सूं अेक लेख लिख्यो जा सकै। सामाजिक स्तर माथै वांनै जाति सूं ले’र वरग तक कितरा संघर्ष झेलणा पड़ै, राम इणरो साखी है। निपट अणपढ अर गंवार, नसै में चूर व्हियोड़ो, ऊंचै कैवीजतै कुळ रो मोटियार जद मांगणियार बुजुर्ग सूं बदतमीजी करतो थको जा’र गावण री फरमाइस करै तो अेकर तो सुरसत खुद सूं अरूठ व्है जावै, पण बो गंधर्व आपरै मोटैपणै री ओळखाण देवतो थको फरमाइस पूरी करै।

लोकतंत्र नै आयां अस्सी साल होवण आळा है, पण प्रतिभा सूं लबरेज इण कौम नै हाल तक वो मान आपां नीं दे सक्या जिणरा अै हकदार है। राम जाणै कुण बै मिनख है जका कपट सूं भरियोड़ां नेतावां नै दी ‘सरहद रा सुल्तान’ या ‘थार रा कोहिनूर’ जेड़ी उपाधियां। आं उपाधियां रा असल हकदार हा सावण खान जेड़ा बै मिनख—जकां आखी उमर गाळ दी संगीत री साधना में। जकां जगत भर में गायो आपां रो लोक। अजे तक इण परंपरा नै आगै बढावण आळा कई नाम म्हनै निगै आवै, जकां रो संरक्षण करणो आपां री साझी जिम्मेदारी है। आं नामां में शकूर खान दव, पप्पू खान, दिलाबर खान उनरोड, ईशाक खान रेडाणा, बिस्मिल्लाह खान कनोई आद सिमरथ सूफी गायक है।

सावण खान रै जावण सूं राजस्थान रै सिंधी सूफी गायन नै मोटी हाण पूगी है, उणरी भरपाई करणियो कोई दूजो नीं व्है सकै। राजस्थान रै लोक सूं सिंधी रो अेक सुर माठ झाल ली। थार रै वायरै साथै गूंजतो अेक कंठ अबै यादां में बच्यो है। पण जद बरसाळै में हळोतरो करतै किणी ट्रैक्टर माथै ऊंचै साद में ‘रातब मिंहड़ा वुट्ठा’ बाजैला तो लागैला कै अमरापुर सूं सावण आपरै मुलक रै मेह माथै राजी व्हैयनै गाय रैयो है अर आवाज सीधी मिरतलोक लग आय रैई है। इण भांत सावण आपरै लोक में अमर रैवैला।

निंवण सावण खान!

स्रोत
  • पोथी : कथेसर ,
  • सिरजक : दिलीप चारण ,
  • संपादक : रामस्वरूप किसान ,
  • प्रकाशक : कथेसर प्रकाशन ,
  • संस्करण : अप्रैल-जून 2026
जुड़्योड़ा विसै