सबद पर सबद

वर्णों के मेल से बने

सार्थक वर्णसमुदाय को शब्द कहा जाता है। इनकी रचना ध्वनि और अर्थ के मेल से होती है। शब्द को ब्रहम भी कहा गया है। इस चयन में ‘शब्द’ शब्द पर बल रखती कविताओं का संकलन किया गया है।

सबद17

उदक पिंयाळां नीपजै

संत सिद्ध देवोजी

कितरां चिलतां ईसर खेलै

संत सिद्ध देवोजी

जबलग जीवै जीतबा

संत सिद्ध देवोजी

हंस बटाऊ काया बिड़ाणी

संत सिद्ध देवोजी

पढियां आगळ वीनती

संत सिद्ध देवोजी

अलख लिख्या कोई लेख न जाणै

संत सिद्ध देवोजी

मुखांकंवल निरखत मन सुदा

संत सिद्ध देवोजी

हर हर नांव चितार

संत सिद्ध देवोजी

परभाते परमेसर सिंवरो

संत सिद्ध देवोजी

निकळंग नांव निरंजण जोगी

संत सिद्ध देवोजी

सुरगां होंतो ज्ञान

संत सिद्ध देवोजी

बाज बाज औ मंदळ गै’रै साद

संत सिद्ध देवोजी

हर-हर नांव जपो मन भाई

संत सिद्ध देवोजी

पुरी पसार कानजी बैठा

संत सिद्ध देवोजी

भगवत बीखो आपरी मरजी

संत सिद्ध देवोजी

अेसा ज्ञान हमारा साधो

परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द