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व्यंग्य1

देस री संतान ई

देस री संतान ई लूटै है खुद रै देस नै माफिया रै भेस में का अफसरां रै भेस में किण सूं कैवां लोकतंत्र री इसी हालत हुई रक्षक ही भक्षक बण्या, नेतावां रै ई भेस में।

मदन केवलिया

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