देस री संतान ई लूटै है खुद रै देस नै माफिया रै भेस में का अफसरां रै भेस में किण सूं कैवां लोकतंत्र री इसी हालत हुई रक्षक ही भक्षक बण्या, नेतावां रै ई भेस में।
आजादी आजादी रै पाछै देश रौ होग्यौ बुरो हाल जनता रैयगी भूखी अर नेता चरग्या माल। कसूर म्हे कर्यो बडो कसूर कर’र आल इंडिया टूर बठै होटल आळां म्हारा फाड़ लिया पूर। खोट सगळा मांय अेक ई खोट जठै ई जावां मांगै नोट। प्रधान बांकणै स्यूं पैलां मुक्को निकळ