सांची तो आ है कै?
दिमाग में उपाध मचातो,
कुकरमां रो सैतान,
अर हियै में
ओजका खातो
सत करमां रौ भगवान।
मिनख नै
नचावै छै दोन्यूं
कठपुळी री दांईं
दिमाग में बैठ्यो सैतान कैवै—
अेस कर!
औगण करबा सूं कतई नीं डर
रुपिया क पाछै भाग
आपणौ ही स्वारथ साध…।
पण हिरदा म बैठ्यो भगवान
नार