व्यंग पर लेख
माणक रै जून 1982 रै अंक में कवि सम्मेलनां री यादां बाबत राजस्थानी कवियां रा कीं सस्मरण छप्पा हा। बीं री आगली कड़ी में मायड़ भाषा रा जूना अर जाणीता कवि रेवतदानजी चारण, गणपतचदजी भंडारी अर लक्ष्मणसिंघजी रसवंत आपरा खाटा-मीठा अनुभव ‘माणक’ रा पाठकां सांमी
च्यारूं मेर मखमली बेकळू रेत रौ पसराव। राजस्थान में जैसलमेर रै बाद रेत रै टीबां रै फिलमांकन रौ दूसरौ खास मुकाम श्रीडूंगरगढ चूरू जिलै रौ अेक कस्बौ। ठीक वां ई दिनां, जदकै मृणाल सेन फ्रांस रै सैयोग सूं जैसलमेर रै कुलधारा गांव में आपरै लाव-लश्कर रै साथै ‘जेनेसिस’