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अंजस सोशल मीडिया
संत काव्य पर पद
दूहा
पद
सबद
चौपाई
अरिल्ल छंद
संवैया छंद
छप्पय
गीत
कुण्डळियौ छंद
कवित्त
सोरठा
काव्य खंड
रमैणी
पद
43
निराकार नहिं ना आकार
संत चरणदास
साधो ऐसी खेती करिये
संत दरियाव जी
गुरु प्रमांण
बाबा रामदेवजी
म्हारौ रे यहु म्हारौ रे
संत टीला
सब सुख आपै रोर कांपै
बखना जी
अवधू अैसा खेल बिचारी
संत हरदास
ब्रह्मा बावै अंग लेबा लागो
पदम भगत
ब्रह्मा च्यार वेद रो नायक
पदम भगत
राहण शाहपुरा में भुरकी
संत सुखरामदास
श्रीकृष्ण बळदेवजी हरि हळधर दोउं वीर
पदम भगत
तिहि तीरथ मेरा मन न्हावे
बखना जी
साधो एक अचम्भा दीठा
संत दरियाव जी
रांम कहौ कलि वहु क्यूं आवै
संत टीला
यहु मन म्हारौ बरजौ रांम
संत टीला
म्हारै हरियल वन रा सूवटडा़
पदम भगत
पति की ओर निहारिये
संत चरणदास
फिट रे फिट 'फिट रे' मन अपराधी
संत टीला
क्यूंन्हैं नींदौ म्हांनै रे
संत टीला
हाइ हाइ हाइ हाइ हाइ हाइ हाइ हाइ
संत टीला
दूध की न मूत की
बखना जी
आरसङी ऊजली रे
बखना जी
बाबा लाज तूंनैं हो
संत टीला
अवधू कउवा तैं सर नासै
संत हरदास
आव रे आव मन पूरिखा
संत टीला
म्हे क्यांन्हैं कहां रे, कोई भावै तैठा जाव
संत टीला
अब म्हारै मनि अैसी आई
संत टीला
भो जल क्यूँ तिरो रे
बखना जी
म्हारै कब घरि आवै रांमजी
संत टीला
गुर कै द्वारै क्यूं न कमाइजै
संत टीला
जोगी कूं कोई जिनि न्यंदौ
संत टीला
अवधू सूतां कौ धन छीजै रै
संत हरदास
अब कुछ रांम दया करि हम कूं
संत टीला
साधैं भूख मास उपवासी
परसजी खाती
अेक अंदेसौ मन मैं रह्यौ
संत टीला
बाजीगर कौ आवै हासौ
संत टीला
संतौ ऐसा यहु आचारा
रज्जब जी
अवधू बैठां का गति नाहीं
संत हरदास
नींदौ रे भाइ नींदौ रे
संत टीला
मरिये तौ धन काहे कूं करिये
संत टीला
न जांणौं सांई म्हारौ कब घरि आवै
संत टीला
हरि भगति बेलि मन में लगाय
आत्माराम 'रामस्नेही संत'
भाइ रे, भेद भरम कै पैलै पासै
संत हरदास
शील बिना नरकै परै
संत चरणदास