संत काव्य पर दूहा

दूहा101

जामण मरण जहाँ नही

संत सुखरामदास

च्यार बरण नर-नार रे

संत सुखरामदास

दान दीया सैंसो कहै

साहबराम राहड़

चिनगी एक जो उपजै

परमानंद बणियाल

बाहर निकल काम कर

साहबराम राहड़

प्रेम बराबर नाहिं तुल

परमानंद बणियाल

जम दाणु क्या देवता

संत सुखरामदास

नांव लियौ जिन सब कियो

साहबराम राहड़