बाप पर लेख
पारिवारिक इकाई में पिता
एक विशिष्ट भूमिका का निर्वाह करता है और यही कारण है कि जीवन-प्रसंगों की अभिव्यक्ति में वह एक मज़बूत टेक की तरह अपनी उपस्थिति जताता रहता है। यहाँ प्रस्तुत है—पिता विषयक कविताओं का एक विशेष संकलन।
एक विशिष्ट भूमिका का निर्वाह करता है और यही कारण है कि जीवन-प्रसंगों की अभिव्यक्ति में वह एक मज़बूत टेक की तरह अपनी उपस्थिति जताता रहता है। यहाँ प्रस्तुत है—पिता विषयक कविताओं का एक विशेष संकलन।
म्हैं आ बात जाणूं हूं के म्हारै बेटै नै आ बात समझावणी पड़सी के सगळा मिनख न्याव माथै चालै कोनी अर सगळा मिनख साचा पण होवै कोनी। पण आप उणनै आ बात ई समझाईजौ के जिण भांत समाज में लुच्चा लफंगा ई होवै। जिण भांत चालाक अर घोर स्वार्थी राजनेता होवै, जिण भांत चोखा