वीर पर दूहा

विकट परिस्थिति में भी

आगे बढ़कर अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले व्यक्ति को वीर कहा जाता है और उसकी वीरता की प्रशंसा की जाती है। इस चयन में वीर और वीरता को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

दूहा69

माई अहड़ा पूत जण

पृथ्वीराज राठौड़

नागण जाया चिटला

सूर्यमल्ल मीसण

दमँगल विच अ - पचौ

सूर्यमल्ल मीसण

धीरा धीरा ठाकुरां

सूर्यमल्ल मीसण

इक-डंकी गिण अेक री

सूर्यमल्ल मीसण

भाभी ! हूं डोढ्यां खड़ी

सूर्यमल्ल मीसण

ज खल भग्गा तो सखी

सूर्यमल्ल मीसण

गोठ गया सब गेह-रा

सूर्यमल्ल मीसण

काय उताळी कंकणी

सूर्यमल्ल मीसण

मतवाळा ! दळ आविया

सूर्यमल्ल मीसण

दूहा परकत रा

कुलदीप सिंह इण्डाली

टोटै सरकां भींतड़ा

सूर्यमल्ल मीसण

मूझ अचंभो हे सखी

सूर्यमल्ल मीसण

सुण हेली ! ढोलै

सूर्यमल्ल मीसण

दूहा वीर रस रा

कुलदीप सिंह इण्डाली

जिण वन भूल न जांवता

सूर्यमल्ल मीसण

अइ रे अकबरियाह

पृथ्वीराज राठौड़

सहु गोधळिया पास

पृथ्वीराज राठौड़

झंडा ओछाड़े गयण

सूर्यमल्ल मीसण

प्रताप सिंह बारहठ पर दूहा

कुलदीप सिंह इण्डाली

कांकड़ त्रंबक त्रहकिया

सूर्यमल्ल मीसण

नह पड़ोस कायर नरां

सूर्यमल्ल मीसण

पातळ रांण प्रवाड़मल

पृथ्वीराज राठौड़

ईस ! घणा जे आखता

सूर्यमल्ल मीसण

नीला ! मो पहली पड़ै

सूर्यमल्ल मीसण

वाज कुमैत विसासतो

सूर्यमल्ल मीसण

गिर ऊंचा ऊंचा गढां

केसरीसिंह बारहठ

दूहा

रामसिंघ सोलंकी

धण रे बळ धणियाप

केसरीसिंह बारहठ

दूहा

मोहन सिंघ

बाप पड़यौ् तिण ठौड़ हूँ

नाथूसिंह महियारिया

चमराळा हुय चूर

जग्गा खिड़िया

ढाळां सिरि धाराळ

जग्गा खिड़िया

घण वाजित घण घाव

जग्गा खिड़िया

वाही रांण प्रतापसी

पृथ्वीराज राठौड़

छिळतै मछरि छडाळ

जग्गा खिड़िया

कदै तक सूतौ रैला

अमर सिंह राजपुरोहित

वा दिस सखी! सुहावणी

नाथूसिंह महियारिया

रण चढ़िया पट पहरियां

नाथूसिंह महियारिया

अेकणि चोट अताग

जग्गा खिड़िया

कटै न को दिन काटियां

नाथूसिंह महियारिया

खग-कूंची जादू करै

नाथूसिंह महियारिया

वाजै इसै विनाणि खग

जग्गा खिड़िया

राणौ फसियौ राड़ में

नारायण सिंह जोधा

शहीद-पचीसी

मदनसिंह राठौड़

सरबत भरिया फळ सझै

केसरीसिंह बारहठ