वीर पर दूहा

विकट परिस्थिति में भी

आगे बढ़कर अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले व्यक्ति को वीर कहा जाता है और उसकी वीरता की प्रशंसा की जाती है। इस चयन में वीर और वीरता को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

दूहा59

माई अहड़ा पूत जण

पृथ्वीराज राठौड़

नागण जाया चिटला

सूर्यमल्ल मीसण

अइ रे अकबरियाह

पृथ्वीराज राठौड़

सहु गोधळिया पास

पृथ्वीराज राठौड़

पातळ रांण प्रवाड़मल

पृथ्वीराज राठौड़

दूहा वीर रस रा

कुलदीप सिंह इण्डाली

प्रताप सिंह बारहठ पर दूहा

कुलदीप सिंह इण्डाली

दूहा परकत रा

कुलदीप सिंह इण्डाली

धीरा धीरा ठाकुरां

सूर्यमल्ल मीसण

खुंदालिम करि खोध

जग्गा खिड़िया

जागि प्रळै रिण जंग

जग्गा खिड़िया

चोथौ चीतोड़ाह

पृथ्वीराज राठौड़

वाही रांण प्रतापसी

पृथ्वीराज राठौड़

टोटै सरकां भींतड़ा

सूर्यमल्ल मीसण

पातळ घड़ पतसाह री

पृथ्वीराज राठौड़

मूझ अचंभो हे सखी

सूर्यमल्ल मीसण

बालक अजीत ने बचावणों

केसरी सिंह सौदा

इक-डंकी गिण अेक री

सूर्यमल्ल मीसण

भाभी ! हूं डोढ्यां खड़ी

सूर्यमल्ल मीसण

ज खल भग्गा तो सखी

सूर्यमल्ल मीसण

सझि आराबां समसमा

जग्गा खिड़िया

कै तौ धव रण जीतिया

नाथूसिंह महियारिया

वा दिस सखी! सुहावणी

नाथूसिंह महियारिया

रण चढ़िया पट पहरियां

नाथूसिंह महियारिया

नीला ! मो पहली पड़ै

सूर्यमल्ल मीसण

दूहा

रामसिंघ सोलंकी

ईस ! घणा जे आखता

सूर्यमल्ल मीसण

बाप पड़यौ् तिण ठौड़ हूँ

नाथूसिंह महियारिया

चमराळा हुय चूर

जग्गा खिड़िया

वाज कुमैत विसासतो

सूर्यमल्ल मीसण

कांकड़ त्रंबक त्रहकिया

सूर्यमल्ल मीसण

वाही रांण प्रतापसी

पृथ्वीराज राठौड़

छिळतै मछरि छडाळ

जग्गा खिड़िया

राणौ फसियौ राड़ में

नारायण सिंह जोधा

शहीद-पचीसी

मदनसिंह राठौड़

जिण वन भूल न जांवता

सूर्यमल्ल मीसण

वाजै इसै विनाणि खग

जग्गा खिड़िया

दमँगल विच अ - पचौ

सूर्यमल्ल मीसण

बड गोळा सर बाण

जग्गा खिड़िया

सुण हेली ! ढोलै

सूर्यमल्ल मीसण

हेली धव चढिया हमैं

नाथूसिंह महियारिया

ढाळां सिरि धाराळ

जग्गा खिड़िया

घण वाजित घण घाव

जग्गा खिड़िया

अेकणि चोट अताग

जग्गा खिड़िया

कटै न को दिन काटियां

नाथूसिंह महियारिया

खग-कूंची जादू करै

नाथूसिंह महियारिया