पूरब पुण्य प्रताप, मिल्यो जमारो मिनख रो।

प्राणी मत कर पाप, चारभुजा रट, चरकिया॥

भावार्थ:- हे चकरिया, पूर्व जन्म के सत्कर्मों के पुण्य प्रभाव से यह मनुष्य की योनि मिली है; इसलिए प्राणधारी मनुष्य, तू पाप-कर्म मत कर और चतुर्भुजधारी भगवान विष्णु को बार-बार याद कर।

स्रोत
  • पोथी : चकरिये की चहक ,
  • सिरजक : साह मोहनराज ,
  • संपादक : भगवतीलाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार
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