जित तित देख्यो जोय, अमल जमायो अल्प दिन।

कायम रह्यो कोय, चलता बणिया, चकरिया॥

भावार्थ:- हे चकरिया, जहाँ कहीं भी भली-भाँति देखा, तो यही पाया कि शासकों ने अल्प समय तक ही शासन किया है। उनमें कोई भी हमेशा के लिए थिर नहीं रहा तथा (अंतिम समय आने पर वे सब) चलते बनें।

स्रोत
  • पोथी : चकरिये की चहक ,
  • सिरजक : साह मोहनराज ,
  • संपादक : भगवतीलाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार
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